पाकेट बुक्स में ट्रेडमार्क लेखकों की शुरुआत - योगेश मित्तल - प्रतिध्वनि

कविता, कहानी, संस्मरण अक्सर लेखक के मन की आवाज की प्रतिध्वनि ही होती है जो उसके समाज रुपी दीवार से टकराकर कागज पर उकेरी जाती है। यह कोना उन्हीं प्रतिध्वनियों को दर्ज करने की जगह है।

शनिवार, 19 सितंबर 2020

पाकेट बुक्स में ट्रेडमार्क लेखकों की शुरुआत - योगेश मित्तल

राज, केशवपंडित, राजवंश और टाइगर के कुछ उपन्यास

त्तर के दशक में एक वक़्त ऐसा आया था, जब हर प्रकाशक ने ट्रेड मार्क चलाये! 

उस दौर में पुराने स्थापित नामों को छोड़ कर, असली नाम वाले इक्का-दुक्का लेखक ही छपे!

गौरी पाकेट बुक्स में केशव पण्डित नाम से छपने वाले सभी उपन्यास खतौली में रहने वाले राकेश गुप्ता ने लिखे, जिनके कुछ उपन्यास नूतन पाकेट बुक्स, मेरठ से "राकेश पाठक" नाम से छपे! 

"मनोज" नाम से मनोज पाकेट बुक्स में छपने वाले आरम्भिक पच्चीस तीस उपन्यास जमील अंज़ुम ने लिखे, जो कि उर्दू में लिखे होते थे और उनका उर्दू से हिन्दी अनुवाद कहिये या रूपांतर - देशराज जी करते थे! उनकी तस्वीरें उपलब्ध नहीं हो सकतीं!

लेकिन पाकेट बुक्स में ट्रेडमार्क की शुरुआत हिन्द या राज ने नहीं की! यह शुरुआत पंजाबी पुस्तक भंडार वालों ने स्टार पाकेट बुक्स के बैनर के साथ की, जिसमें पहला नाम था राजवंश - राजवंश लिखने के लिए उर्दू में लिखने वाले आरिफ मारहर्वीं साहब को अनुबंधित किया गया, जो पहले कैसर हयात निखट्टू ( मार्शल क्यू) के उपन्यास लिखते थे! 


पूरा लेख अब यहाँ पढ़ें: पॉकेट बुक्स में ट्रेडमार्क लेखकों की शुरुआत

- योगेश मित्तल

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