संस्मरण श्रृंखलाएँ - प्रतिध्वनि

कविता, कहानी, संस्मरण अक्सर लेखक के मन की आवाज की प्रतिध्वनि ही होती है जो उसके समाज रुपी दीवार से टकराकर कागज पर उकेरी जाती है। यह कोना उन्हीं प्रतिध्वनियों को दर्ज करने की जगह है।

संस्मरण श्रृंखलाएँ

दिल्ली के जनपथ होटल में दिलीप वेंगसरकर के साथ योगेश मित्तल जी - एक यादगार क्षण !


योगेश मित्तल जी द्वारा संस्मरणों की कई लम्बी श्रृंखलाएँ लिखी गयी हैं। उन्हीं को इधर संकलित किया गया है। भागों के नाम पर क्लिक कर आप उन्हें पढ़ सकते हैं।


राजहंस बनाम विजय पॉकेट बुक्स

लेखक राजहंस यानी केवल कृष्ण कालिया कभी विजय पॉकेट बुक्स के लिए लिखा करते थे। लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि राजहंस और केवल कृष्ण कालिया के बीच मुकद्दमे तक की नौबत आ गयी। इन संस्मरणों में लेखक ने अपनी उस वक्त की यादों को दर्ज किया है। 



कुछ यादें वेद प्रकाश शर्मा के साथ

वेद प्रकाश शर्मा का नाम हिन्दी  के सबसे लोकप्रिय लेखकों में शुमार होता है। लेखक  न केवल उनको जानते थे बल्कि उनके दोस्त भी थे। अपनी उन्हीं यादो को उन्होंने इस श्रृंखला में संजोया है। 



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