कुमार कश्यप जब बहुत बुलन्दी पर थे, तब उनसे हमेशा मेरठ में किसी न किसी प्रकाशक के यहाँ ही मिलना हुआ, पर जब भी वह मिलते हमेशा जल्दी में रहते थे, "नमस्ते - जय राम जी की" से आगे बात कम ही बढ़ी।
आम तौर पर उन्हें बाहरी चाय की दुकान पर चाय पीते कभी देखा नहीं, पर एक बार सुबह-सुबह वह ईश्वरपुरी के बाहर ही गिरधारी चाय वाले की दुकान पर दिख गये।
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